नए रेल क्वाटरों के आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरिके से करने के लिए सभी विभाग के अधिकारियों के समक्ष लॉटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाना
रेलवे क्वॉटरों के आवंटन की प्रक्रिया ऑनलाइन किया जाये
IRSTMU के महामंत्री आलोक चन्द्र प्रकाश ने रेल मंत्री श्री अश्वनी वैष्णव जी को रेल कर्मचारियों की क्वाटर से संबंधित मूलभूत समस्याओं के व्यापक समाधान के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा कि जहां भी जंक्शन स्टेशन हैं तथा जहाँ हाउसिंग कमेटियां गठित है वहाँ भ्रष्टाचार चल ही रहा है। हाउसिंग कमेटीयों में दलालों का जोर चलता है जो ट्रेड युनियन को भी बदनाम कर गलत ढंग से तथा अनियमित तरीकों का इस्तेमाल कर अपने चहेतों को अच्छे क्वॉटर दिलवाते हैं तथा वास्तविक जरुरतमंद रेल कर्मचारी मुंह ही ताकता रह जाता है। हाउसिंग कमिटियों की मिटिंग भी नियमित नहीं होती और जरुरतमंद कर्मचारी कई – कई महीनों तक रेलवे क्वॉटर खाली होने के बावजूद भी बाहर किराये के मकान में रहने को मजबूर होते हैं जो या तो बहुत महंगे होते हैं या कई बार अविवाहित रेल कर्मचारियों को नहीं मिल पाते या स्थानियता की समस्या की वजह से भी प्राइवेट मकान नहीं मिल पाते। खाली पड़े क्वॉटर में दूसरी अरचन विभागीय पूल की आती है। कुछ दबंग विभाग और उनके दबंग कर्मचारी अच्छे क्वॉटर ले लेते हैं और खाली क्वॉटरों पर अपने विभाग का ठप्पा चढ़ा कर अपने पूल का करवा लेते हैं। और इस प्रकार भले ही क्वाटर खाली हो पर दूसरे विभाग के जरुरतमंद कर्मचारी को नहीं आवंटित किया जाता क्योंकि वह क्वाटर किसी और विभाग के पूल का होता है। इस प्रकार रेल क्वाटर खाली होते हुए भी जरुरतमंद रेल कर्मचारी को तो किराये के मकान में किसी तरह गुजारा करने को मजबूर होना ही पड़ता है परन्तु रेल आवास उपलब्ध होते हुए भी रेल प्रशासन को हाउस रेंट अलाउंस का भुगतान रेल कर्मचारी को करना पड़ता है जिसकी वजह से रेलवे का भी नुकसान होता है। उदाहरण पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल के पालनपुर में कई महिनों से टीआरडी विभाग के टाइप 4 क्वाटर खाली पड़े हैं पर सिगनल विभाग के जे.ई.(सिगनल) को आवंटित नहीं किया जा रहा है।
पूल की लड़ाई से शुरु होता है दलाली का खेल, भ्रष्ट हाउसिंग कमिटी जरुरतमंद रेल कर्मचारियों से मुँह मांगी किमत मिलने के पश्चात् भ्रष्ट तरीकों से रेल क्वाटर का सौदा करती हैं। कई बार विभागीय लड़ाई और विभागीय राजनिति जरुरतमंद रेल कर्मचारी को रेल आवास का आवंटन नहीं होने देती।
आलोक चन्द्र के अनुसार सभी रेलवे क्वॉटरों के आवंटन की प्रक्रिया ऑनलाइन किया जाना चाहिए साथ ही कितने क्वॉटर उपलब्ध हैं इसकी जानकारी पार्दशिता के साथ ऑनलाइन उपलब्ध होनी चाहिए। किसी स्टेशन पर जब भी कोई रेल कर्मचारी की नई नियुक्ति होती है उसकी आवश्यकता अनुसार उसके अनुरोध पर बिना पूल की लड़ाई के खाली पड़े रेल क्वॉटर का आवंटन तत्काल पार्दशिता के साथ ऑनलाइन किया जाना चाहिए।
रेल क्वॉटर से ही संबंधित एक और महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि जहाँ नये रेलवे क्वॉटर बन रहे हैं वहाँ जितने विभाग के कर्मचारी हैं और सभी विभागों से उनकी आवश्यकता पूछने के बाद नए रेल क्वाटरों के आवंटन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरिके से करने के लिए सभी विभाग के अधिकारियों के समक्ष लॉटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए क्योंकि दबंग विभाग और उनके दबंग कर्मचारी अच्छे क्वॉटर ले लेते हैं और जरुरतमंद रेल कर्मचारी मुँह देखता रह जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अभी पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल के एकता नगर रेलवे स्टेशन पर 20 टाइप 2 तथा 6 टाइप 3 नये क्वॉटर बने परन्तु आवंटन में दबंग विभाग और उनके दबंग कर्मचारियों ने अच्छे क्वॉटरों का बंदर बांट कर लिया तथा उचित प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया गया तथा कई जरुरतमंद कर्मचारिय़ों को क्वॉटर ही नहीं मिल पाया जैसे 20 टाइप 2 क्वाटरों में से एक भी क्वाटर सिगनल विभाग को नहीं दिया गया।
No comments:
Post a Comment