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Thursday, December 19, 2024

मालगाड़ी की चपेट में आने से रेलवे सिग्नल टेक्नीशियन की मौत: एक वक्त पर तीनों लाइन पर आ गईं ट्रेनें, 9 महीने पहले हुई थी शादी, एक दिन पहले ही ट्रेनिंग से आए थे

झांसी में गुरुवार सुबह मालगाड़ी की चपेट में आने से रेलवे टेक्नीशियन की मौत हो गई। गिरीराज प्रसाद मीना अपने साथियों के साथ रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे थे। तभी तीनों लाइन पर ट्रेन आ गई। साथी चिल्लाए भी, मगर जब तक वो कुछ समझ पाते मालगाड़ी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और हमने तुरन्त ही उन्हें सिविल अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।



एक्सीडेंट में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा बबीना स्टेशन के यार्ड में हुआ है। गिरीराज प्रसाद मीना की करीब 9 माह पहले ही शादी हुई थी। वह राजस्थान के कोटा के रहने वाले थे। परिजन झांसी के लिए रवाना हो गए हैं।

साथी चिल्लाया, हटने का इशारा भी किया

हेल्पर सुभाष ने बताया कि मैं चिल्लाया और ट्रैक से हटने का इशारा भी किया। 
गिरीराज प्रसाद मीना (31) राजस्थान के कोटा जिले के गिरधरपुरा के रहने वाले थे। वह झांसी रेल मंडल के सिग्नल एंड दूरसंचार विभाग में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत हैं। फिलहाल उनकी ड्यूटी बबीना स्टेशन पर थी। गुरुवार सुबह वह स्टेशन यार्ड में हेल्पर सुभाष व अन्य साथियों के साथ काम कर रहे थे।

सुभाष ने बताया कि अप, डाउन लाइन पर ट्रेन खड़ी थी। तभी थर्ड लाइन पर ही गाड़ी आने के सिग्नल हो गए। तब हम लोग ट्रैक से हट गए। मैं गिरीराज को छोड़कर आगे चला गया। तभी वे ट्रैक पर कुछ करने लगे। इसी दौरान झांसी की ओर से मालगाड़ी आ गई। मैं चिल्लाया और हटने का इशारा किया। जब तक वे कुछ समझ पाते, मालगाड़ी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और हमने तुरन्त ही उन्हें सिविल अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मौके पर खड़ी रही गाड़ी मालगाड़ी के लोको पायलट को जैसे ही घटना का आभास हुआ तो उन्होंने गाड़ी रोक कर झांसी कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ने बबीना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमॉर्टम के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेज दिया। अब घरवालों को भी सूचना दी गई थी। वे कोटा से झांसी के लिए रवाना हो गए।
एक दिन पहले ड्यूटी पर आए थे गिरीराज की शादी 9 माह पहले मार्च 2024 में हुई थी। वह पत्नी के साथ झांसी में रहते थे। एक माह पहले वह रिफ्रेशर कोर्स के लिए गाजियाबाद गए थे। तब पत्नी को घर छोड़ आए थे। कोर्स से लौटने के बाद बुधवार को ही गिरीराज ने ड्यूटी जॉइन की थी। अब उसे अगले सप्ताह छुट्‌टी लेकर घर जाना था। उससे पहले ही हादसा हो गया।

गिरीराज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी बहन की शादी हो चुकी है। मौत के बाद मातम का माहौल है। उसके सीनियर अधिकारी व रेलवे कर्मचारी सदमे में है। वे शव के साथ पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंच गए। मामले में रेलवे के PRO मनोज कुमार सिंह का कहना है कि बबीना की तीसरी लाइन पर सिग्नल का काम था, जिसके लिए टेक्नीशियन पहुंचे थे। दुर्भाग्य से यह घटना हो गई।

झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह ने कहा, "ट्रेन की चपेट में आने से उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। जब तक वह अस्पताल पहुंचे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में सभी सुरक्षा सावधानियां बरती गईं और रेल प्रशासन की ओर से कोई चूक नहीं हुई।
"हालांकि 'सिग्नल मेंटेनर्स यूनियन' ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों की कमी के कारण सिग्नल कर्मचारी और तकनीशियन काम के दबाव में हैं, जिसके कारण वे घातक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।

'इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलिकॉम मेंटेनर्स यूनियन' (आईआरएसटीएमयू) के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने कहा, "मंडल से मुझे जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार प्रसाद ने बुधवार की शाम को सिग्नल की समस्या को ठीक किया था और उन्हें बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे फिर से समस्या को ठीक करने के लिए भेजा गया था।"

उन्होंने कहा, "रेलवे में करीब 25 प्रतिशत सिग्नल मेंटेनर्स (सिग्नल की देखरेख करने वाले) की कमी है, जिसके कारण मौजूदा कर्मचारियों को रिक्त पदों की भरपाई के लिए अधिक काम करना पड़ता है। सिग्नल तकनीशियन पर चीजों का संचालन करने का अत्यधिक दबाव होता है और उस दबाव में कर्मचारी अपनी सुरक्षा के बारे में चिंतित नहीं रह पाते।"
IRSTMU के अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि बिना पर्याप्त संशाधन के सिग्नल एवं टेलिकॉम विभाग के कर्मचारियों से काम लिया जाता है और अभाव एवं दबाव में आकर इस प्रकार दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।‌

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